“सभ किछु हम नव बना दैत छी!”
1तखन हम एक नव आकाश आ एक नव पृथ्‍वी देखलहुँ। पुरान आकाश आ पुरान पृथ्‍वी, दूनू लुप्‍त भऽ गेल छल आ आब समुद्रो नहि रहल। 2तकरबाद हम पवित्र नगर, नव यरूशलेम, केँ स्‍वर्ग सँ परमेश्‍वर लग सँ उतरैत देखलहुँ। ओ अपन वरक लेल श्रृंगार कयल गेल नव कनियाँ जकाँ सजाओल गेल छल। 3तखन हमरा सिंहासन सँ एक आवाज जोर सँ ई कहैत सुनाइ पड़ल, “देखू, परमेश्‍वरक निवास आब मनुष्‍यक बीच मे छनि। परमेश्‍वर ओकरा सभक संग निवास करताह। ओ सभ हुनकर प्रजा होयत आ परमेश्‍वर अपने ओकरा सभक बीच रहि कऽ ओकरा सभक परमेश्‍वर होयथिन। 4ओ ओकरा सभक आँखिक सभ नोर पोछि देथिन। तकरबाद ने मृत्‍यु रहत, ने शोक, ने विलाप आ ने कष्‍ट, किएक तँ पहिलुका बात सभ समाप्‍त भऽ गेल अछि।”
5तकरबाद सिंहासन पर जे विराजमान छलाह, से व्‍यक्‍ति हमरा कहलनि, “देखू, सभ किछु हम नव बना दैत छी।” तखन ओ हमरा कहलनि, “ई बात सभ लिखू, किएक तँ ई सत्‍य अछि और एहि पर भरोसा राखल जा सकैत अछि।” 6ओ हमरा फेर कहलनि, “पूर्ण भऽ गेल! हम अल्‍फा और ओमेगा, अर्थात् शुरुआत आ अन्‍त छी। जे केओ पियासल होअय तकरा हम मङनी मे जीवनक जलक सोता सँ पिअयबैक। 7जे सभ विजयी होयत, से सभ ई बात सभ प्राप्‍त करबाक अधिकारी होयत। हम ओकरा सभक परमेश्‍वर होयबैक आ ओ सभ हमर पुत्र होयत। 8मुदा डरपोक सभक, अविश्‍वासी सभक, घृणित लोकक, हत्‍यारा सभक, अनैतिक शारीरिक सम्‍बन्‍ध राखऽ वला सभक, जादू-टोना कयनिहार सभक, मुरुतक पूजा कयनिहार सभक आ सभ झूठ बजनिहारक स्‍थान ओहि आगिक कुण्‍ड मे होयतैक जे गन्‍धक सँ धधकैत रहैत अछि। यैह अछि दोसर मृत्‍यु।”
9तकरबाद जाहि सात स्‍वर्गदूत सभ लग सातटा अन्‍तिम विपत्ति सँ भरल सात कटोरा छलनि, तिनका सभ मे सँ एक गोटे हमरा लग आबि कऽ कहलनि, “एतऽ आउ, हम अहाँ केँ दुल्‍हिन, अर्थात् बलि-भेँड़ाक स्‍त्रीक दर्शन करायब।” 10तखन ओ हमरा प्रभुक आत्‍माक नियन्‍त्रण मे राखि कऽ एक विशाल आ उँचगर पहाड़ पर लऽ जा कऽ पवित्र नगर, अर्थात् यरूशलेम, देखौलनि। ओ नगर परमेश्‍वर लग सँ स्‍वर्ग सँ उतरि रहल छल। 11ओ परमेश्‍वरक महिमाक तेज सँ प्रकाशित छल आ बहुमूल्‍य पाथरक समान, सूर्यकान्‍त वा आर-पार देखाय वला सीसा जकाँ चमकि रहल छल। 12ओकर चारू कात एक पैघ आ उँचगर छहरदेवाली छल जाहि मे बारहटा फाटक छल आ प्रत्‍येक फाटक पर एक-एकटा स्‍वर्गदूत ठाढ़ छलाह। सभ फाटक पर इस्राएलक बारहो कुल मे सँ एक-एक कुलक नाम लिखल छल। 13पूब दिस तीन फाटक, उत्तर दिस तीन फाटक, दक्षिण दिस तीन फाटक आ पश्‍चिम दिस तीन फाटक छल। 14नगरक छहरदेवाली बारहटा न्‍योक पाथर पर बनाओल गेल छल जाहि पर बलि-भेँड़ाक बारहो मसीह-दूतक नाम लिखल छल।
15जे स्‍वर्गदूत हमरा सँ बात कऽ रहल छलाह तिनका लग नगर आ ओकर फाटक सभ आ नगरक छहरदेवाली केँ नपबाक लेल सोनाक एकटा नापऽ वला लग्‍गा छलनि। 16नगर चौखूट छल। ओकर लम्‍बाइ आ चौराइ बराबरि छल। ओ लग्‍गा सँ नगर केँ जखन नपलनि तँ ओकर लम्‍बाइ 800 कोस भेल। ओकर लम्‍बाइ, चौराइ आ उँचाइ एके रंग छलैक। 17नगरक छहरदेवाली केँ जखन नपलनि, तँ ओकर मोटाइ मनुष्‍य सभक नापक अनुसार, जे नाप स्‍वर्गदूत सेहो प्रयोग कयलनि, 144 हाथ भेल। 18नगरक छहरदेवाली सूर्यकान्‍त पाथर सँ बनल छल, आ नगर शुद्ध सोन सँ बनल छल, जे साफ सीसा जकाँ आर-पार देखाइ दैत छल। 19ओहि नगरक न्‍यो हर प्रकारक बहुमूल्‍य पाथर सँ सुसज्‍जित छल। न्‍योक पहिल पाथर सूर्यकान्‍तक, दोसर नीलमक, तेसर गोदन्‍तीक, चारिम मरकतक, 20पाँचम सुलेमानीक, छठम गोमेदक, सातम स्‍वर्णमणिक, आठम पेरोजक, नवम पुखराजक, दसम लहसनियांक, एगारहम धूम्रकान्‍तक आ बारहम चन्‍द्रकान्‍तक छल। 21बारहो फाटक बारह मोती सँ बनल छल। प्रत्‍येक फाटक एक-एकटा मोतीक बनल छल। ओहि नगरक मुख्‍य सड़क आर-पार देखाय वला सीसा जकाँ शुद्ध सोन सँ बनल छल।
22हम ओहि नगर मे कोनो मन्‍दिर नहि देखलहुँ, किएक तँ सर्वशक्‍तिमान प्रभु-परमेश्‍वर आ बलि-भेँड़ा ओकर मन्‍दिर छथि। 23नगर मे सूर्य आ चन्‍द्रमाक प्रकाशक आवश्‍यकता नहि अछि, किएक तँ परमेश्‍वरक महिमाक तेज ओकर इजोत होइत अछि आ बलि-भेँड़ा ओकर डिबिया छथि। 24जाति-जातिक लोक सभ नगरक इजोत मे चलत आ पृथ्‍वीक राजा सभ अपन वैभव केँ ओहि मे लाओत। 25नगरक फाटक कखनो दिन मे बन्‍द नहि कयल जायत आ राति ओतऽ होयबे नहि करत। 26ओहि नगर मे जाति-जातिक लोक सभक वैभव आ सम्‍मान लाओल जायत। 27मुदा कोनो अपवित्र वस्‍तु आ घृणित काज कयनिहार अथवा झूठ पर आचरण कयनिहार व्‍यक्‍ति ओहि नगर मे प्रवेश नहि कऽ पाओत, बल्‍कि मात्र ओ लोक सभ जिनकर नाम बलि-भेँड़ाक जीवनक पुस्‍तक मे लिखल छनि।

Notes


*21:6 21:6 “अल्‍फा और ओमेगा”—यूनानी वर्णमाला मे पहिल और अन्‍तिम अक्षर

21:16 21:16 मूल मे, “12,000 स्‍टेडिआ”

21:17 21:17 वा “उँचाइ”