0^याकूबविपत्तिओ मे लाभसुननिहारे नहि, कयनिहारो बनूभेद-भाव पाप अछिविश्वास आ काज, दूनू जरूरीअपना मुँह पर नियन्त्रण राखूईश्वरीय बुद्धिक गुणपरमेश्वरक अधीन होउकाल्हि अहाँक हाथ मे नहिशोषण कयनिहार धनिक सभ केँ चेतावनीधैर्य राखूप्रार्थनाक सामर्थ्य